स्वतन्त्रता अब मना रहें हम
पर अपने अस्तित्व मिटा रहें हम
मत भूलो इस बात को श्रीमान
राम किशन के वारिस हैं हम
फिरंगीयों से पुर्वज जुझे
हिंदुस्तान में कहे पराया मुझे
यही हैं क्या हमारी स्वतन्त्रता
अमरानाथ से शिवजी पूछे
लहु में हामारी गन्गा प्रावाहित
राम सेतु हमें करे वीचलित
देष हमारी धर्म हमारा
फिर हिन्दू वानी क्योँ हो अनूचित
काशी से रामेश्वर तक
कश्मीर से केरल तक
भारत माँ के वीर जवानों
छीन लो अब तुम अपना हक़
मालवा में तुम सौराष्ट्र में तुम
काकतीय तलवार हो तुम
मौर्या और होयसला में हो
मराठा के ललकार हो तुम
जाती से न भेद करो
हिन्दू हिन्दू एक जुडो
तभी सच्ची स्वतंत्रता होगी
जब पुनह अखंड भारत का जन्म हो
- जय श्री राम
प्रसन्ना गोपालन
11 comments:
very nice prasanna.. you have an alternate career in place...
kaise mai tujh par tippany karo
teri madhur vani par sara desh
nyochavar hai.
main to kya mere jeevan par tera adhikar hai.
simple yet very effective....
Prasanna hum prasann ho gaye.
प्रिय मित्र प्रसन्ना ,
अप्प कई कविता फाड़ कर भौत आनंद आया , कॉलेज के बाद मैंने हिंदी के इतनी अच्छी कविता अब्ब पड़ी है , अप्प के विचार और देश प्रेम की भावना सरहनियी है ! हम अप्प कई एस रचना सी भौत फ्रावित हुए है , हमरे दिल को इस अविता नै छु लिया है , आपसे हम नेवाधन करते है की अपनी सोच और अविता लकिन गारी रखिये , आपकी इस चेष्टा साईं लूगो में जागृति ई गी ! बहकी बाण चित हम दूर संचार यंत्र सी अप्प इ साथ संपर्क मई रहंगे !
आपका मित्र
क्षितिज
Mate.. what can i say.. u are an 'epitome of excellence'we all are really proud of u.
Good Job !!!
Nice work Prasanna...i didn't knew u can also write.
hey i kno it will be gr8. i could not understand the full thing but as far as i have understood its sooper man!
nice work prasanna!.. keep it coming..!
"Akhand Bharat" aging back to Bharat, Rama, Krisha or who? :)
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