स्वतन्त्रता अब मना रहें हम
पर अपने अस्तित्व मिटा रहें हम
मत भूलो इस बात को श्रीमान
राम किशन के वारिस हैं हम
फिरंगीयों से पुर्वज जुझे
हिंदुस्तान में कहे पराया मुझे
यही हैं क्या हमारी स्वतन्त्रता
अमरानाथ से शिवजी पूछे
लहु में हामारी गन्गा प्रावाहित
राम सेतु हमें करे वीचलित
देष हमारी धर्म हमारा
फिर हिन्दू वानी क्योँ हो अनूचित
काशी से रामेश्वर तक
कश्मीर से केरल तक
भारत माँ के वीर जवानों
छीन लो अब तुम अपना हक़
मालवा में तुम सौराष्ट्र में तुम
काकतीय तलवार हो तुम
मौर्या और होयसला में हो
मराठा के ललकार हो तुम
जाती से न भेद करो
हिन्दू हिन्दू एक जुडो
तभी सच्ची स्वतंत्रता होगी
जब पुनह अखंड भारत का जन्म हो
- जय श्री राम
प्रसन्ना गोपालन